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Patna PMCH News: नर्सिंग स्टाफ के बाद जूनियर डॉक्टर भी हड़ताल पर, ओपीडी और इलेक्टिव ऑपरेशन ठप

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Alam Ki Khabar: पटना के पीएमसीएच में नर्सिंग स्टाफ और जूनियर डॉक्टरों के बीच विवाद गहरा गया है। जूनियर डॉक्टरों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया है, जिससे ओपीडी और इलेक्टिव ऑपरेशन प्रभावित हुए हैं।

पटना, 8 जुलाई। आलम की खबर: राजधानी पटना स्थित पीएमसीएच में नर्सिंग स्टाफ और जूनियर डॉक्टरों के बीच शुरू हुआ विवाद अब बड़े टकराव में बदल गया है। सोमवार से शुरू हुए विवाद ने मंगलवार को नया मोड़ ले लिया, जब जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) ने शाम तीन बजे से अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा कर दी। इसके बाद अस्पताल की नियमित स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने लगी हैं और इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के कारण ओपीडी सेवाएं, सामान्य वार्डों में नियमित इलाज और सभी ऐच्छिक (इलेक्टिव) ऑपरेशन अगले आदेश तक स्थगित कर दिए गए हैं। इससे दूर-दराज से इलाज के लिए आए मरीजों और उनके परिजनों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कई मरीजों को ऑपरेशन और इलाज के लिए नई तारीख का इंतजार करना पड़ रहा है। हालांकि जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि उनका आंदोलन मरीजों के जीवन से जुड़ी सेवाओं को प्रभावित करने के लिए नहीं है। इसलिए इमरजेंसी, आईसीयू, लेबर रूम, इमरजेंसी ऑपरेशन थिएटर और अन्य जीवनरक्षक सेवाएं पहले की तरह जारी रहेंगी। जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि चिकित्सकों के साथ मारपीट, बदसलूकी और धमकी की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक दोषियों पर सख्त कार्रवाई और डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। दूसरी ओर नर्सिंग स्टाफ भी अपनी मांगों पर अड़ा हुआ है और जूनियर डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए हड़ताल जारी रखे हुए है। दोनों पक्षों के आमने-सामने आने से बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था पर व्यापक असर दिखाई देने लगा है। अब मरीजों और उनके परिजनों की नजर सरकार और अस्पताल प्रशासन पर टिकी है कि यह गतिरोध कब समाप्त होगा और सामान्य चिकित्सा सेवाएं कब बहाल होंगी।

संवाद से ही निकलेगा समाधान

पीएमसीएच जैसे बड़े अस्पताल में लंबे समय तक गतिरोध रहने का सबसे अधिक असर मरीजों पर पड़ता है। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की सुरक्षा तथा सम्मान महत्वपूर्ण है, लेकिन मरीजों की चिकित्सा व्यवस्था भी समान रूप से जरूरी है। ऐसे में सभी पक्षों के बीच शीघ्र संवाद और समाधान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

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